जीवाश्म से बने ईंधन का एक नया रूप माना जा सकता है. इसमें 18% हाइड्रोजन होती है, जो कि ईंधन का अच्छा स्त्रोत हो सकता है, वो भी न्यूनतम प्रदूषण के साथ. अब ये जानते हैं कि अमोनिया बनाते कैसे हैं. इसके लिए हाइड्रोकार्बन को हाइड्रोजन और अमोनिया में बदला जाता है. ये सीधे पावर स्टेशन में काम आते हैं. ब्लू अमोनिया को जलाए जाने पर उससे कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती है. इस तरह से इसे दुनिया की पहली कार्बन-मुक्त गैस माना जा रहा है, जो ईंधन बनाने के काम आ सकती है.
पहली बार ब्लू अमोनिया (blue ammonia) का इंटरनेशनल स्तर पर व्यापार होने वाला है. ये सऊदी अरब से जापान भेजा जा रहा है, जहां इसका इस्तेमाल बिजली घरों में बिजली पैदा करने के लिए होगा. बता दें कि ब्लू अमोनिया वो पदार्थ है, जिससे बिना प्रदूषण के ही बिजली बनाई जा सकती है. इस तरह से पर्यावरण के लिए काफी सचेत जापान दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा, जो बड़े स्तर पर अमोनिया को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए काम में लाएगा. जानिए, क्या है ये अमोनिया.
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